जो दोस्त बनकर दगा है दे…

By on 1-21-2013

जो दोस्त बनकर दगा है दे, उनकी दोस्ती कहाँ है भला? हमने भी यारी निभाई बड़ी, पर हमको भी मिला है क्या? तुम हमसे कहते हो हमारा दिल है या है ये पत्थर… हम जान भी दे दे देखे ना, वो जान भी ले ले सोचे...

जिंदगी एक प्यास सी है…

By on 1-16-2013

जिंदगी एक प्यास सी है, भुझते दिए की आग सी है !! यह तो है एक अजब दास्तां, ज़िन्दगी एक तलाश सी है !! कभी महौब्हत से मिल जाए तो, ज़िन्दगी एक रात सी है !! कभी गुजर जाती है, ख़ामोशी से जो, जैसे य़ेह शमशान सी है !! जैसे य़ेह शमशान सी है !! सुनती है नहीं, सुनना चाहे जो कभी !! यह ज़िन्दगी कैसी खामोश आवाज़ सी है !! यह ज़िन्दगी कैसी...

एक ख़त लिखना है किसी को !!

By on 1-16-2013

एक ख़त लिखना है किसी को, कि बोल महौबत के मिलते नहीं है !! यु मिल जाते है लोग ज़िन्दगी में, पर दिल से दिल कभी मिलते नहीं है !! कोई उनसे क्या सवाल पूच्छे? जवाब जिनसे पाना हो मुश्किल !! बेगाने शहर में हर कोई है बेगाना, अपनी पहचानं के इन्सां मिलते नहीं है !! दर्द की यह कैसी दास्तान है? पहला शब्द इश्क है, और आखरी ख़ुदा है !! लोगो का दर...

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